योगी सरकार का यू-टर्न, बोले- प्रवासी मजदूरों के लिए दूसरे राज्यों को इजाजत लेने की जरूरत नहीं

संवाद न्यूज़ नेटवर्क

देश में चल रही गंदी सियासत ने मेहनत करके दो वक्त की रोटी खाने वाले श्रमिकों को परेशान करके रख दिया है। जब एक नेता कोई आदेश पारित करता है तब तक उसका विपक्षी विरोध करने के लिए खड़ा हो जाता है। कुछ ऐसा ही एक बार फिर हुआ है।

दरअसल पूरे देश में लागू लॉकडाउन के कारण विभिन्न स्थानों पर यूपी के श्रमिक और अन्य प्रवासी लोग फंसे गए थे। जिनको वापस उनके घर तक लाने के लिए योगी सरकार ने काफी मशक्कत की। श्रमिकों की समस्या को देखते हुए सीएम योगी ने ये ऐलान कर दिया कि अब जिन राज्यों को यूपी के श्रमिकों की आवश्यकता है या फिर श्रमिकों को बुलाना चाहते हैं तो सबसे पहले उनको अनुमति लेनी होगी।

इसके बाद ही श्रमिकों को काम पर लगने के लिए भेजा जाएगा। इस घोषणा के बाद राजनीतिक दुनिया के बादशाहों में खलबली मच गई और तरह-तरह की बातें करने लगे। इन लोगों ने सीएम योगी के इस कदम को निष्क्रिय और गलत बताया। जिसके बाद सीएम योगी ने एक बार फिर ये फरमान जारी किया है कि अब दूसरे राज्यों को श्रमिकों को अपने यहां काम पर रखने के लिए किसी भी तरह की अनुमति की आवश्यकता नहीं लेनी होगी।

बताते चलें कि सीएम योगी ने जब ये बयान दिया था कि श्रमिकों को ले जाने से पहले राज्यों को अनुमति लेनी होगी तो इस पर विपक्ष ने जमकर हमला बोला था। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सपा मुखिया अखिलेश यादव ने सीएम योगी के इस कदम को गलत करार दिया था। वहीं कर्नाटक में कांग्रेस अध्यक्ष डी के शिवकुमार ने भी सीएम योगी को कई ट्विट किया और संविधान का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि यूपी उनके सरकार की निजी संपत्ति नहीं है।

वो इतने पर ही नहीं रूके आगे कहा कि श्रमिकों को काम पर रखने से रोकने का फैसला असंवैधानिक है और आवाजाही की स्वतंत्रता के खिलाफ है। वहीं दूसरी तरफ एमएनएस के अध्यक्ष राज ठाकरे ने भी कहा कि बिना अनुमति के हम भी यूपी के श्रमिकों को नही आने देंगे।

बता दें कि ये जितने भी नेताओं की आवाज सीएम योगी के एक फैसले को लेकर निकल रही है ये सभी वही लोग हैं जो यूपी के फंसे मजदूरों की मदद करने में नाकाम साबित हुए। इन लोगों को सियासत छोड़कर पहले उन बेबस मजदूरों से जाकर पूछना चाहिए कि क्या जिस दर्द को झेलकर वो अपने घर तक पहुंचे हैं उसके बाद वो वापस काम पर जाने के भी इच्छुक हैं या नहीं। उन बेबस लोगों से अच्छी राजनीति इन नेताओं को कोई और नहीं पढ़ा सकता है।

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