मोदी बने मदारी, बन्दर बन गए युवा : हिमांशु राय

 जनता की आवाज़ (हिमांशु राय) 

संवाद स्पेशल सम्पादकीय: एक ऐसा चेहरा जिसकी हवाएं अब राजनीतिक गलियारे से उठकर देश का भविष्य कहे जाने वाले युवाओं के दिलों पर भी राज करने लगी हैं। वो भगवा रंग जिसके रंग में रंगे युवा अपना भविष्य भूलकर, सड़कों पर उतरकर नारेबाजी करने से भी नहीं चूक रहे हैं। आंदोलन की आग में देश को जला देने के इच्छुक हो गए हैं। आखिर ऐसा क्यों? सबसे पहले मैं बता देना चाहूंगा कि जिस चेहरे की मैं चर्चा कर रहा हूं वो चेहरा हैं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का। मोदी जी को वो दिन नहीं भूलना चाहिए कि जब एक समय ऐसा था जब देश के युवा ही नहीं बल्कि देश के कई राज्यों ने एक साथ ये बिगुल बजाया कि देश का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बनाना है। लेकिन सवाल ये उठता है कि आखिर लोगों के दिमाग में ये विचार आया कैसे? जी हां ये बहुत बड़ा प्रश्न है कि जनता ने नरेंद्र मोदी को देश का सरताज क्यों सौंपा?

अगर दिमागी पैंतरे को आजमाया जाए और वक्त को उसकी कसौटी पर कसकर देखा जाए तो ये एक शीशे की तरह साफ दिखाई देने लगता है कि जनता कुछ बदलाव चाहती है और युवा अपना भविष्य। लेकिन क्या देशवासियों के सपने पूरे होते नजर आ रहे हैं? क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता की कमान संभालने के बाद देश के युवाओं को रोजगार मिल गया? मैं अपनी आवाज को बुलंद करके पूछना चाहता हूं कि देश में और प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनने के बाद कितनी वैकेंसी आई जिससे युवाओं को रोजगार मिला? क्या माताएं और बहने सुरक्षित हो गईं? क्या सीएम योगी का एंटी रोमियो का पहिया अब भी उसी रफ्तार में है जिस रफ्तार में यूपी की कमान संभालते वक्त था? इन प्रश्नों का जवाब कौन देगा।

 

सड़कों पर उतरे युवा क्या पूरे दिन में एक बार भी सोचते हैं कि उनका भविष्य बन रहा है या और नरक बनता जा रहा है? देश में महंगाई पैर पसारते जा रही है, और युवाओं के हांथ में नौकरी तक नहीं। अब तक माननीय मोदी जी युवाओं को रोजगार का सुनहरा अवसर दिखा रहे थे लेकिन वो नगरी जहां के कोतवाल माने जाते हैं बाबा काल भैरव। जी हां मै वाराणसी की ही बात कर रहा हूं। जहां अमित शाह और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव का मंत्र देने विद्या के मंदिर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ पहुंचे। वहां पहुंचकर युवाओं को रोजगार देने की बजाय, माताओं बहनों को सुरक्षित रखने का उपाय करने के बजाय एक ऐसा मंत्र फूंका गया जिससे यह साफ पता चलता है कि पहले अंग्रेज देश को लूट गए और अब राजनीतिक पार्टीयां भी बखूबी हांथ साफ कर रही हैं। इस देश का भविष्य माने जाने वाले इन युवाओं के सामने उस वक्त प्रश्न खड़ा हो गया जब अमित शाह ने इन नौजवानों को पार्टी से जुड़ने के बदले पीएम बनने तक के सपने दिखाए। उनहोंने ये भी कहा कि हमने अपना करियर भी बूथ अध्यक्ष से शुरू किया था। युवा उद्घोष के बहाने बीजेपी की कोशिश देश भर के नौजवानों को पार्टी से जोड़ने की है। युवा उद्घोष रैली के साथ ही 2019 के चुनाव के लिए पार्टी ने हिंदुत्व का अपना एजेंडा भी साफ कर दिया है। इतना ही नहीं कार्यक्रम में करीब 17 हजार युवा शामिल हुए।

अब सबसे बड़ा जो प्रश्न खड़ा हो गया है भाईयों बहनों वो ये है कि मोदी जी युवाओं के हांथ में रोजगार दे रहे हैं या राजनीति? वाह रे देश के नादान युवा लगता है आंखों में भगवा रंग कुछ इस कदर पड़ गया है कि अपना जीवन भी नहीं दिखाई देता? लेकिन क्या करें ये बेरोजगार युवा। इनको भी पता है कि अगर किसी के खिलाफ आवाज उठाई जाएगी और सच बातें बोली जाएगी तो उसको जेल में ठूंस दिया जाएगा। गुनाह बस ये हो गया कि उसने सच्चाई बोल दी और नेताजी की मानहानि हो गई। कुछ इसी एजेंडे पर चल रही है देश की सरकार। आपको बताना चाहूंगा कि नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में अपनी जीत का परचम लहराने के लिए पूरी रणनीति से चुना गया है। कार्यक्रम में जो भी लोग शामिल थे वो युवा थे। उनकी उम्र 18 से 35 वर्ष तक थी। उनका मोबाईल नंबर लिया गया। क्योंकि बीजेपी को ये बखूबी पता है कि युवाओं के अन्दर जोश है और इसका फायदा 2019 के चुनाव में लिया जा सकता है। (तस्वीरे- सोशल मीडिया )

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