कुछ इस तरह देवरिया शेल्टर होम कांड की खलनायिका बन गई करोड़ों की मालकिन

संवाद न्यूज़ ब्यूरो 

देवरिया कांड आजकल खूब चर्चा में है. इसकी संचालिका गिरजा त्रिपाठी की भी कहानी कम रोचक नहीं है, कैसे मामूली सी परिवार से आने वाली गिरिजा त्रिपाठी ने करोड़ों की संपत्ति अर्जित कर ली.बताया जा रहा है कि गिरिजा के पति भटनी एक शुगर मिल में काम करते थे. इस दौरान गिरिजा ने परिवार का आय बढ़ाने के लिए घर से ही सिलाई कढ़ाई का काम शुूरू कर दिया. यह काम करते हुए धीरे—धीरे शेल्टर होम खोला. इसके बाद दिन दूनी रात चौगुनी इसकी आमदनी में बढ़ोतरी होने लगी. देवरिया से लेकर गोरखपुर तक इसने शेल्टर होम का जाल बिछाया. गिरिजा त्रिपाठी की पहुंच धीर—धीरे स्थानीय प्रशासन में बढ़ने लगी, आसपास के लोग इससे घबराने लगे.

देवरिया स्थित मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं सेवा संस्थान चलाने वाली गिरिजा त्रिपाठी महिला और बच्चों के अधिकारों के लिए जानी जाती थी. वह देवरिया और गोरखपुर के नामी गिनामी लोगों के साथ कंधा से कंधा मिलाकर चलती थी. चुनावों की हार जीत में भी जमकर भूमिका निभाती थी, गिरिजा के बड़े—बड़े नेताओं और अधिकारियों से पकड़ थी.

देवरिया शेल्टर होम कांड गिरिजा त्रिपाठी ( फोटो साभार – बीबीसी हिंदी )

वहां के लोग गिरिजा के खिलाफ कुछ भी बोलने से डरते थे. उसे महिलाओं और बच्चों के लिए योगदान करने के लिए कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है. गिरिजा त्रिपाठी पूर्वी उत्तर प्रदेश में शेल्टर होम की चेन चलाती है. उसके बच्चों के शेल्टर होम से लेकर वृद्धों के शेल्टर होम तक चलते हैं. उसने शेल्टर होम से ही करोड़ों रुपये का कारोबार बीते 25 वर्षों में फैला लिया.

1993 में उसने अपनी एनजीओ का पंजीकरण कराया था. यह पंजीकरण चिटफंड कंपनी के तौर पर कराया गया था लेकिन बाद में उसे शेल्टर होम चलाने का चस्का चढ़ा और उसने स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर एनजीओ के उद्देश्य बदलवा लिए. उसके बाद वह लगातार शेल्टर होम चलाती रही और अपना साम्राज्य फैलाती रही। जून 2017 में यह एनजीओ ब्लैकलिस्ट हो गया.

देवरिया शेल्टर होम कांड गिरिजा (फोटो साभार – बीबीसी हिंदी )

इसलिए शुरू किया सिलाई सेंटर
देवरिया में गिरिजा ने मां विंध्यनासिनी प्रशिक्षण संस्थान बनाया और सिलाई प्रशिक्षण का काम शुरू किया. वह अपने एनजीओ के माध्यम से देवरिया और आसपास जिलों में साक्षरता के लिए कैंप लगाने लगी. 15 साल पहले उसकी एनजीओ को सरकारी प्रॉजेक्ट्स मिलने शुरू हो गए. उसके बनाए शेल्टर होम को सरकार फंड देने लगी. उसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा.

खोले कई शेल्टर होम
शेल्टर होम संचालन के दौरान उसके संपर्क कई सरकारी और स्थानीय अधिकारियों के साथ हो गए. उसने देवरिया में ही तीन शेल्टर होम खोल लिए. इसके साथ ही एक-एक वृद्धाश्रम देवरिया, गोरखपुर और सलेमपुर में खोला. इसके अलावा वह एक अडॉप्शन सेंटर भी चलाती है जहां से बच्चे विदेशी कपल को गोद दिए जाते हैं.

बनाईं करोड़ों की संपत्तियां
पुलिस अधिकारियों की मानें तो गिरिजा देवी के पास रजला बाजार और उसरा बाजार में कई जमीनें हैं. रजला बाजार की जमीन में उसने दो मंजिला इमारत बनाई है. उसरा बाजार की जमीन में वह वृद्धाश्रम खोलने की तैयारी में थी.

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