बिहार में सियासी तूफान, तेजस्वी बेबस, भाजपा के मंसूबे ध्वस्त !

  • नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की मुलाकात
  • बिहार में एनआरसी को राज्य में लागू नहीं करने का प्रस्ताव पास

देश में दिल्ली हिंसा (Delhi Violence) सुर्खियों में थी और उससे निपटने को लेकर बीजेपी (BJP) के चाणक्य कहे जाने वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) हालात से निपटने की जुगत भिड़ा रहे थे। इसी बीच बिहार (Bihar ) में ऐसा सियासी तूफान आया कि सभी सन्न रह गये। बीजेपी के दिग्गजों को हाथ से तोता उड़ने का अहसास हो उठा।

दरअसल, महागठबंधन से अलग होने के बाद एक—दूसरे पर सियासी शत्रु की तरह हमलावर रहने वाले मुख्यमंत्री नीतीश और आरजेडी के तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) की मुलाकात हुई। इस मुलाकात ने बिहार के सियासी हलकों में भूचाल ला दिया। इस बैठक के बाद बिहार विधानसभा (Bihar Vidhansabha) में एनआरसी को राज्य में लागू नहीं करने का प्रस्ताव पास हो गया। साथ ही वर्ष 2010 के प्रावधानों के तहत एनपीआर पर भी मुहर लग गयी।

यह चौंकाने वाला था। नीतीश कुमार और तेजस्वी के बीच एक कमरे में हुई इस मुलाकात के मायने भी निकाले जाने लगे हैं। दरअसल, प्रदेश सरकार के अगुवा और प्रमुख विपक्षी दल के नेता बीच हुई इस मुलाकात के दौरान आरजेडी के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी और कांग्रेस विधायक अवधेश नारायण सिंह भी मौजूद थे।

इस मुलाकात ने बीजेपी और उसके सहयोगी संगठन का माथा ठनका दिया। दरअसल, मुलाकात के दौरान जेडीयू, आरजेडी और कांग्रेस के नेताओं की मौजूदगी और उसके बाद बीजेपी के एजेंडे में शामिल महत्वपूर्ण एनआरसी को लागू न करने का प्रस्ताव पास होना एक अलग ही कहानी बयां करते नजर आ रहे हैं। वह कहानी जो 2015 के दौरान बीजेपी के खिलाफ बुनी गई थी। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, जेडीयू प्रमुख नीतीश और कांग्रेस ने मिलकर महागठबंधन तैयार किया और बीजेपी के देश भर में चल रही मोदी लहर को थाम दिया था।

पाला बदलने में माहिर नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की इस मुलाकात को लेकर एक बार फिर आशंका पैदा हो गई कि बिहार में कहीं वर्ष 2015 की कहानी दोहराने की तो तैयारी नहीं है।

सियासी पंडितों का कहना है कि इस मुलाकात के दौरान नीतीश कुमार ने इन तीनों नेताओं के सामने अपनी धर्मनिरपेक्ष छवि पेश करने की पूरी कोशिश की। तेजस्वी ने भी नीतीश से कहा कि जब वे खुले मंच से एनआरसी का विरोध पहले ही कर चुके हैं तो एनपीआर और एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव भी पास कराया दिया जाए। नीतीश ने भी इस पर अपनी रजामंदी देने में देर नहीं लगायी। मुख्यमंत्री कक्ष के हुई इस मुलाकात के बाद सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो दोनों प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास हो गये।

बता दें कि बिहार में यह दावे से कहा जाने लगा था कि चाचा—भतीजे यानी नीतीश-तेजस्वी फिर एक साथ नहीं आने वाले। लेकिन, राजनीति में सब मुमकिन है, वाली कहावत बिहार में चरितार्थ होने का इशारा मिलता नजर आ रहा है। चर्चा है कि कहीं वर्ष 2020 में वे फिर से एकसाथ तो नहीं होने वाले हैं?

दरअसल, एनआरसी को लेकर नीतीश कुमार भी बीते कुछ दिनों से परेशान हैं। उनकी परेशानी यह है कि कहीं मुस्लिम समाज उनसे दूर न हो जाये। क्योंकि सीएए, एनआरसी और एनपीआर को लेकर देश में बन रहे माहौल में बीजेपी के साथ खड़े रहने में उन्हें अपनी धर्मनिरपेक्ष छवि सुरक्षित नहीं दिख रही है। इसे बकररार रखने की उन्होंने तरकीब निकाल ली है। कहा यह भी जाने लगा है कि कहीं चुनाव से पहले वे मोदी—शाह को झटका दे कांग्रेस व आरजेडी के साथ मिल बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन का मोर्चा न खोल दें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.