चारा घोटाला केस में लालू यादव दोषी करार, कोर्ट से सीधे जेल जाएंगे RJD चीफ

बिहार के सबसे चर्चित चारा घोटाले से जुड़े तीन मामलों में रांची की विशेष अदालत ने आज पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव को दोषी करार दे दिया है.फैसला सुनाए जाने से पहले लालू यादव ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सीएम नीतीश कुमार और सीबीआई मुझे जेल भिजवाना चाहती है. मुझे जेल जाने से डर भी नहीं लगता. मुझे न्याय पर विश्वास है और न्याय मिलेगा.

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव पर रांची की सीबीआई कोर्ट ने फैसला सुना दिया है. देवघर चारा घोटाला केस में लालू यादव को कोर्ट ने दोषी करार दिया है. जबकि बिहार के पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्रा को बरी कर दिया गया है. उनके अलावा ध्रुव भगत को भी बरी कर दिया गया है.

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फैसला का वक्त टलने के बाद लालू यादव एक बार फिर सीबीआई कोर्ट पहुंच गए हैं. उनके पहुंचने पर कोर्ट के बाहर मौजूद समर्थकों ने जय ‘भोलेनाथ’ का जयकारा किया. लालू यादव और पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्रा समेत सभी 22 अभियुक्त कोर्ट रूम पहुंच गए हैं. कोर्ट रूम में जज के पहुंचने तक सभी अभियुक्त एक दूसरे कमरे में बैठे रहे.

ये है पूरा केस

साल 1990 से 1994 के बीच देवघर कोषागार से पशु चारे के नाम पर अवैध ढंग से 89 लाख, 27 हजार रुपये निकालने का आरोप है. इस दौरान लालू यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे. हालांकि, ये पूरा चारा घोटाला 950 करोड़ रुपये का है, जिनमें से एक देवघर कोषागार से जुड़ा केस है. इस मामले में कुल 38 लोग आरोपी थे जिनके खिलाफ सीबीआई ने 27 अक्टूबर, 1997 को मुकदमा दर्ज किया था. आज लगभग 20 साल बाद इस मामले में फैसले की घड़ी आई है.

इससे पहले चाईबासा कोषागार से 37 करोड़, 70 लाख रुपये अवैध ढंग से निकालने के चारा घोटाले के एक दूसरे केस में सभी आरोपियों को सजा हो चुकी है.

ये हैं आरोपी

इस केस में लालू प्रसाद के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा, बिहार के पूर्व मंत्री विद्यासागर निषाद, पीएसी के तत्कालीन अध्यक्ष जगदीश शर्मा एवं ध्रुव भगत, आर के राणा, तीन आईएएस अधिकारी फूलचंद सिंह, बेक जूलियस एवं महेश प्रसाद, कोषागार के अधिकारी एस के भट्टाचार्य, पशु चिकित्सक डा. के के प्रसाद तथा शेष अन्य चारा आपूर्तिकर्ता आरोपी थे. सभी 38 आरोपियों में से 11 की मौत हो चुकी है, जबकि तीन सीबीआई के गवाह बन गए हैं. वहीं दो ने अपना गुनाह कुबूल कर लिया था, जिसके बाद उन्हें 2006-07 में ही सजा सुना दी गई थी.

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