ए मेरी कलम इतना सा अहसान कर दे, कह ना पाई जो जुबान वो बयान कर दे।

संवाद न्यूज 

हमारे देश का ऐसा दुर्भाग्य है कि जब यहां कोई व्यक्ति संघर्ष के पन्नों को पलटता हुआ विकास की तरफ बढ़ रहा होता है तो हमारी जनता उस पन्ने को उल्टा पलटने का प्रयास करती है। कहने का तात्पर्य ये है कि हम किसी व्यक्ति के अंदर अच्छाई नहीं देखना पसंद करते बल्कि हमें उसके अंदर बुराईयां पहले दिख जाती हैं। हम उसकी दूसरों से तुलना करने लगते हैं। ऐसा इसलिए होता है कि हम अपनी बुद्धी और अपने विवेक का उपयोग करने में शर्माते हैं। हम खुद को दूसरों से ज्यादा काबिल समझने लगते हैं। जरा ध्यान से सोचीए कि जब आप मतदान करने जाते हैं तो आपको आपके बड़े या आपके हमदर्द लोग पहले ही समझा देते हैं कि देखना बचवा फलां नेता के लिए मतदान करना और आप के दिमाग की बत्ती बहीं से गुल हो जाती है।

आप अब ज्यादा आगे पीछे नहीं सोचते और बटन दबा कर चले आते हैं। जी हां यही सच्चाई है और बाद में जब आपके अनुसार काम नहीं दिखाई देता है तो आप गाली देना शुरू कर देते हैं। क्योंकि हम उस भेंड़ के समान हैं जो ज्यादा आगे पीछे नहीं सोचती बस खोपड़ी झुकाये बढ़ती जाती है और जब किसी कुएं में गिरती है तो बाकी भेड़े भी गिर जाती हैं। अब हम एक ऐसे शख्स के बारे में बात करेंगे जिन्होंने अपने जीवन में काफी हद तक संघर्ष किया है लेकिन जनता को उनके आदर्श नहीं दिखाई देते, जनता को उनकी उपलब्धियां नहीं दिखाई देतीं बल्कि दिखता है तो सिर्फ और सिर्फ कमी। जी हां हम दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की बात कर रहे हैं।

क्या कभी आपने सोचा है कि अरविंद केजरीवाल ने अपने जीवन में कौन कौन से अच्छे काम किये हैं। अरविंद केजरीवाल ने कौन कौन सी उपलब्धियां हासिल की हैं। आइये नजर डालते हैं उनके जन्म से लेकर उनके राजनीतिक सफर तक।

अरविंद केजरीवाल का जन्म 16 अगस्त 1968 को हिसार, हरियाणा के एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ। उनके पिता का नाम गोविंद राम केजरीवाल है और माता का नाम गीता देवी है। अरविंद केजरीवाल के पिता इलेक्ट्रीकल इंजीनियर थे। जो बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से ग्रेजुएट थे। अरविंद केजरीवाल 1989 में आईआईटी खड़गपुर यांत्रिक अभियांत्रिकी में स्नातक की उपाधी प्राप्त किये। 1992 में अरविंद केजरीवाल भारतीय राजस्व सेवा में आ गए और उन्हें दिल्ली में आयकर आयुक्त कार्यालय में नियुक्त किया गया। इतना ही नहीं अरविंद केजरीवाल ने भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम भी शुरू कर दी और आयकर कार्यालय में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए संघर्ष भी किया। 2006 में अरविंद केजरीवाल ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया। अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली आधारित एक नागरिक आन्दोलन परिवर्तन की स्थापना की थी जिसमें नौकरी से इस्तीफे के बाद पूरी लगन से जुड़ गए। कई लोगों के साथ मिलकर उन्होंने सूचना अधिकार अधिनियम के लिए अभियान शुरू किया।

दिल्ली में सूचना अधिकार अधिनियम को 2001 में पारित किया गया। और अंत में राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संसद ने 2005 में सूचना अधिकार अधिनियम को पारित कर दिया। अरविन्द केजरीवाल को 2006 में मैग्सेसे पुरस्कार से सममानित किया गया।

2 अक्टूबर 2012 को अरविंद केजरीवाल ने अपने राजनीतिक सफर की औपचारिक शुरुआत कर दी। उन्होंने गांधी टोपी, जो अब “अण्णा टोपी” भी कहलाने लगी है पहनी थी। उन्होंने टोपी पर लिखवाया, “मैं आम आदमी हूं।” अरविंद केजरीवाल ने 2 अक्टूबर 2012 को ही अपने भावी राजनीतिक दल का दृष्टिकोण पत्र भी जारी किया। राजनीतिक दल बनाने की घोषणा के बाद उन्होंने कांग्रेस नेता सोनीया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा और और भूमि-भवन विकासकर्ता कम्पनी डीएलएफ के बीच हुए भ्रष्टाचार का खुलासा किया।

आम आदमी पार्टी के गठन की घोषणा अरविंद केजरीवाल एवं लोकपाल आंदोलन के बहुत से सहयोगियों द्वारा 26 नवंबर 2012 भारतीय संविधान अधिनियम की 63 वीं वर्षगांठ के अवसर पर दिल्ली स्थित स्थानीय जंतर-मंतर पर की गई। कुछ इस तरह से अरविंद केजरीवाल ने मेहनत और संघर्ष के बल पर अपना राजनीतिक कद बड़ा किया है जो कि सराहनीय है।

 

 

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