माथे का सिंदूर मिटाओ, तब मिलेगी पेंशन…

हम बात करे इस दौर की तो हालत बद से बत्तर होते जा रहे है अमीर और अमीर होता जा रहा है तो गरीब और गरीब होता जा रहा है ऐसा ही दृश्य कल एक बार फिर संसद भवन के मार्ग पर देखने को मिला, केंद्र सरकार की तरफ से भारत सरकार राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम की तरफ से बुजर्गो को पेंशन दी जाती है जिसमे केंद्र सरकार का 200 रुपए प्रतिमाह का योगदान रहता है मतलब गरीबों को 200 रुपए पेंशन देने में भी सरकार को दिक्कत हो रही है दिक्कतों और पेंशन की राशि बढ़ाने की मांग को लेकर कल दिल्ली के संसद मार्ग पर विभिन्न राज्यों से आए वृद्धों ने बीते दिनों प्रदर्शन किया. उनकी मांग है कि उन्हें न्यूनतम तीन हज़ार रुपये की पेंशन मिलनी चाहि

PIC BY – (SOCIAL MEDIA)

बात समझने की है की गरीब और बुजर्गो की हालात ये हो गई की अपनी थोड़ी सी पेंशन की रकम बढ़ाने के लिए इतने दूर दूर से भूखे प्यासे रहकर अपने छोटे छोटे बच्चो को गोदी में लाकर संसद भवन के सामने प्रदर्शन करते है फिर भी उन्हें अपनी हक़ की लड़ाई नहीं मिलती है हमें इन्हें बारीकी से समझाना चाहिए की आखिर हमारा देश किस तरफ से किस तरफ जा रहा है

 

बात तो तब हुई जब एक महिला ने बताया की मै गाँव के प्रधान यानी मुखिया से अपनी पेंशन के बारे में पूछने गयी तो उन्होंने बड़ा आपत्तिजनक बात कही और कहा की पहले तुम अपनी मांग का सिंदूर (मतलब अपने सुहाग) मिटा कर आओ तब आपको पेंशन मिलेगी. बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर ज़िले के महंत मनियारी गांव की रहने वाली उर्मिला देवी ने ये बात कहते हुए रोने लगी इसलिए वह वह पेंशन की मांग को लेकर 29 सितंबर और एक अक्टूबर को दिल्ली के संसद मार्ग पर हुए प्रदर्शन में शामिल हुई थीं.

उर्मिला देवी ने बताया कि उनके तीन बेटे हैं लेकिन तीनों अलग-अलग रहते हैं. पति का हाथ टूट गया है, वो चल-फिर नहीं पाते हैं. उर्मिला अपने पति के साथ खर-पतवार के बने घर में रहती हैं. इस स्थिति में रहने के बाद भी आज तक उन्हें सरकार से कोई पेंशन नहीं मिला. उनका कहना है कि जब भी वो गांव के मुखिया बब्बन राय के पास सरकार की ओर से दिए जा रहे वृद्धावस्था पेंशन के लिए जाती हैं तो वे उन्हें डांट कर भगा देते हैं.

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