कर्नाटक की सियासी फिजा में ‘लॉलीपॉप’ पॉलिटिक्स

संवाद न्यूज़ ब्यूरो 

  (साभार से – ब्लॉग जनता की आवाज़,विकाश शुक्ल )

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नमो ऐप के जरिए कर्नाटक बीजेपी के सभी जन प्रतिनिधियों, विधानसभा चुनाव के सभी उम्मीदवारों, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से बात की. प्रधानमंत्री ने इस दौरान उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार के मुद्दों को बताया. बता दें कि कर्नाटक की 224 विधानसभा सीटों के लिए 12 मई को वोट डाले जाएंगे.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पहले राजनीतिक दल विकास के मुद्दे पर राजनीति नहीं करते थे, बल्कि जाति-पंत-धर्म के आधार पर राजनीति करते थे. पीएम ने कहा कि कुछ राजनीतिक दल एक जाति को चुनाव से पहले लॉलीपॉप पकड़ाते हैं और फिर चुनाव में उनका उपयोग करते हैं. चुनाव बदल जाता है और इसी तरह हर नए ग्रुपों को लॉलीपॉप देते हैं. उन्होंने कहा कि भारत के राजनीतिक कल्चर को कांग्रेस के कल्चर से मुक्ति दिलानी होगी.

कांग्रेस को राज्यों की सत्ता से बेदखल करने के मिशन में जुटी बीजेपी के लिए कर्नाटक का चुनाव में मायूसी हाथ लग सकती है. चुनाव पूर्व कराए गए पांच में से चार सर्वे में वह कांग्रेस से पिछड़ती नजर आ रही है. वहीं कांग्रेस पांच सर्वे में से एक में बहुमत तो एक में इसके करीब खड़ी है. एचडी देवेगौड़ा की जेडीएस मायावती की बीएसपी के साथ तालमेल कर तीन सर्वे रिपोर्ट में किंग मेकर के तौर पर उभर रही है.

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी की लहर में बीजेपी के हाथों मात खाने वाली कांग्रेस के लिए बीते साढ़े चार साल खासे मायूसी भरे रहे हैं. लोकसभा चुनाव के बाद हुए राज्यों के विधानसभा चुनावों में वह बीजेपी के आगे बेबस नजर आती रही है. बिहार में महागठबंधन के जरिए बीजेपी को मात देने और पंजाब के सिवा उसके हाथ कामयाबी के नाम पर कुछ खास हासिल नहीं हुआ. बीते साल मणिपुर और मिजोरम के साथ वह गोवा में सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद वह बीजेपी की रणनीति के आगे सत्ता से दूर रहने को मजबूर होना पड़ा. हाल में पूर्वोत्तर में हुए मेघालय और नगालैंड में भी सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद उसे बीजेपी से मात खानी पड़ी.

मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने इस दौरान न सिर्फ अपने ढाई दशक पुराने गुजरात के गढ़ को बचाया बल्कि उत्तर प्रदेश में ऐतिहासिक बहुमत के साथ सरकार बनाई. त्रिपुरा में भी उसने दशकों से कायम लेफ्ट के किले को ढहाकर बीजेपी शासित राज्यों की संख्या 20 पहुंचा दी. एक—एक कर कांग्रेस को राज्यों की सत्ता से बेदखल करने और उसे इससे दूर रखने के मिशन को आगे बढ़ा रही बीजेपी के निशाने पर अब कर्नाटक है. कर्नाटक विधानसभा के लिए 12 मई को मतदान होना है और नतीजे 15 मई को सबके सामने होंगे.

सत्ताधारी कांग्रेस और बीजेपी के बीच यहां घमासान मचा हुआ है. कांग्रेस जहां बीजेपी को मात देकर वर्ष 2019 लोकसभा चुनाव की इसमें संजीवनी तलाश रही है तो बीजेपी उससे एक और राज्य छीनकर उस पर मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ाने की कोशिश में है. हिंदुत्व, लिंगायत और दलित मुद्दों के बीच हो रहे इन चुनावों को लेकर चुनाव परिणामों को टटोलने की कोशिशें तमाम सर्वे कंपनियां कर रही हैं.

कर्नाटक चुनाव को लेकर सर्वे से जुड़े संगठनों की ओर से चुनाव पूर्व पांच अनुमान सामने आए हैं. इनमें से एक सर्वे में सत्ताधारी कांग्रेस के सिर फिर कामयाबी का सेहरा बनने का अनुमान है. वहीं एक सर्वे में उसे जरूरी 122 विधायकों के बहुमत से उसके खाते में महज 11 विधायक कम होने का अनुमान है.

इस सर्वे में भी अन्य दलों के समर्थन से उसकी सत्ता बरकरार दिख रही है. चुनाव पूर्व सर्वे में चौंकाने वाली बात है कि बीजेपी यहां पांच सर्वे में से एक चार रिपोर्ट में वह दूसरे नंबर पर दर्ज है. महज एक में वह कांग्रेस से आगे है, लेकिन वह सत्ता से काफी दूर है. वहीं तीन सर्वे में एचडी देवेगौड़ा की जेडीएस और बीएसपी का गठबंधन किंगमेकर बनकर उभरता नजर आ रहा है. यानि कांग्रेेस यदि बहुमत में हासिल करने से चूकती है तो फिर सत्ता की चाबी उसके ​साथ होगी.

यह है मौजूदा स्थिति कर्नाटक विधानसभा में सत्ताधारी कांग्रेस के 122 ​विधायक हैं तो बीजेपी के 43 अैर जेडीएस के 34 सदस्य हैं. बीएसआरसी के तीन, केजेपी के दो, केएमपी के एक और आठ निर्दलीय विधायक हैं. गुजरात में मोदी ब्रिगेड से मात खाने और पूर्वोत्तर में लगी मायूसी के बाद अब कांग्रेस को अपने हताश कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने के लिए कर्नाटक की जीत खासी अहम है. दूसरी ओर उत्तर भारत के बाद कर्नाटक के जरिए बीजेपी दक्षिण में अपनी पैठ जमाने की कोशिश में है.

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