चैत्र नवरात्र की शुरूआत आज से, जाने इस नवरात्र का महत्व

संवाद न्यूज़ ब्यूरो 

आज से चैत्र नवरात्र की शुरूआत हो रही है और नवरात्र से ही हिंदू नव वर्ष शुरू हो जाएगा। शास्त्रों के मुताबिक इसी दिन सृष्टि की भी रचना हुई थी। मान्यता है कि इसी दिन लोग अपने शुभ काम करते हैं। भगवान श्रीराम और धर्मराज युधिष्ठिर का राजतिलक इसी दिन हुआ था। कहा तो ये भी जाता है कि भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार इसी दिन हुआ था।

– जब सृष्टि की रचना हुई तब सतयुग का आरंभ हुआ। जब भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप में पहला अवतार लेकर धरती की स्थापना की। तब भगवान राम का राजतिलक हुआ। जब युधिष्ठिर ने राजपाठ संभाला तब चैत्र के नवरात्र आते हैं। ठीक उसी दिन से हिंदू नए साल की शुरुआत हुई। दुनिया में पहली जनवरी को नए साल के रूप में मनाया जाता है। लेकिन भारत में चैत्र महीने के पहले दिन नये साल के तौर पर मनाया जाता है।

पुराणों के मुताबिक चैत्र के नवरात्र के पहले दिन आदि शक्ति प्रकट हुई थीं और उन्हीं के कहने पर भगवान ब्रह्मा ने चैत्र शुक्ल के पहले दिन सूर्योदय के वक्त सृष्टि का निर्माण किया। इसलिए इसी दिन सृष्टि के उत्सव के तौर पर भी मनाया जाता है। कहा तो ये भी जाता है कि सतयुग की शुरुआत भी इसी दिन से हुई थी..चेत्र नवरात्र के तीसरे दिन भगवान विष्णु ने मतस्य रूप में पहला अवतार लिया और धरती की स्थापना की और चैत्र के नवरात्र में ही भगवान विष्णु का सातवां अवतार भगवान राम के रूप में हुआ था। चैत्र महीने का पहले दिन काफी शुभ माना जाता है यानी किसी भी काम की शुरूआत इसी दिन से की जाती है।

मान्यता है कि सृष्टि की रचना शुरू होने से पहले पूरे ब्रह्मांड में अंधकार ही अंधकार था। कहीं कुछ भी नहीं था। ऐसे में मां आदि शक्ति ने ही सबसे पहले सृष्टि की रचना के बारे में सोचा। उन्होंने सबसे पहले ब्रह्मा..विष्णु और महेश को प्रकट किया। इन तीनों के बाद सरस्वती..लक्ष्मी और मां काली की उत्पत्ति हुई। इसके बाद सृष्टि के विस्तार के लिए आदि शक्ति ने ब्रह्माजी को सरस्वती। भगवान विष्णु को लक्ष्मी और भोलेनाथ को देवी काली सौंप दी। सृष्टि के निर्माण की शुरुआत के लिए भगवान ब्रह्मा ने चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा का दिन ही चुना। यहीं वजह है कि कि नए संवत्सर की शुरुआत और नव वर्ष का आरंभ इसी दिन से माना जाता है।

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