सुकमा में फिर हमला और फिर बयानबाजी…बाकी दिन वही बेफिक्री

 देश की आवाज़ (विकाश शुक्ला )

सुकमा में नक्सलियों ने बारूदी सुरंग से विस्फोट कर सीआरपीएफ की एंटी लैंडमाइन व्हेकिल को उड़ाकर नौ जवानों की जान ले ली. कई घायल भी हैं. हर बार की तरह फिर देश के जवानों की शहादत का बदला लेने के बयान अधिकारिक तौर पर आने लगे हैं. अपनी ताकत और भारतीय जवानों के हौसलों का बखान कर चुनौतियां दी जा रही हैं. लेकिन, सोचने की बात यह है कि क्या यह पहला हमला है, जिसमें जवान मारे गए हैं. क्या यह पहली बार है, जब देश के गृहमंत्री ने अपने ही देश के सिस्टम और सेना से लड़ने वालों को ललकारा है. नहीं, फरवरी में भी नक्सली हमले में भारतीय जवान मारे गए थे. उस समय भी ऐसे ही बयान फिजा में लहराए थे. समय जरूर बदला, लेकिन हालात नहीं बदले हैं. चुनौती और ललकार की इन गूंजों के बीच हम जवानों की शहादत को सलाम कर उन्हें भुला दिया जाता है. नेता और सरकारें भी उसे भुला सियासी फसलों को काटने में जुट जाती हैं. उनके लिए देश और यहां के सिस्टम के दुश्मनों से ज्यादा अहम सियासी दुश्मन हो जाते हैं.

एक परिवार ने अपना सहारा खो दिया तो एक बहन ने डोली को कांधा लगाने वाले भाई को हमेशा के लिए खो देने की वेदना उसके कलेजे को चीर रही होगी. उन्हें खो देने का गम भले ही उनके दिलों—दिमाग को साल रहा हो, लेकिन उस परिवार और देश के तमाम लोगों का सिर इन शहीद जांबाजों ने फख्र से उंचा कर दिया.

देश के जांबाज किसी सरकारी या प्रशासनिक सलामी के मोहताज नहीं. वे अपने देश के लिए बदस्तूर अपनी जान की बाजी लगाते रहेंगे, शहादत करते रहेंगे. लेकिन, सवाल यह भी है कि आखिर कब तक भारतीय जवानों के घर के आंगन के हर कोने में सूनापन पसरा रहेगा. सियासतदारों को जरा इन शहीदों के आंगन में भी झांक कर देखना चाहिए…यहां चीख—पुकार और सूनी आंखों में छिपे दर्द और मलाल को पढ़ना होगा. इसे पढ़ेंगे तो इसमें छिपा यह सवाल भी आपको कचोटेगा कि क्या देश की सेना के ये जवान बलिदान होने के लिए हैं या फिर बलि होने के लिए. शहीद होने वालों के परिजनों की सरकार से यही गुजारिश है कि जल्द से जल्द कार्रवाई करें…लेकिन, सरकार का हर बार का रटा-रटाया जवाब कि व्यर्थ नहीं जाएगा शहीदों का बलिदान…इस बार भी सरकार से यही जुमला सुनाई दिया, जो हर बार दोहराया जाता रहा है.

पीएम बनने से पहले नरेंद्र मोदी हर रैली में कहते थे कि एक सिर के बदले 100 सिर लाएंगे..लोगों ने मोदी को पीएम बनाया..लेकिन पीएम भी देश के शहीदों को इंसाफ दिलाने में नाकाम साबित हो रहे हैं.. इसलिए देश मोदी जी से गुहार लगा रहा है कि कार्रवाई करिए..शहीदों को इंसाफ दिलाइए

ऐसे में कई सवाल उठते हैं…क्या ऐसे संवेदनशील मामले की राजनीतिकरण जायज़ है ? क्या आतंकवाद को मजहब से जोड़ा जाना सही है ? आतंक तो बस सराभत के चौला में हौवानित का दूसरा नाम है…तो हम इस जंग में एक साथ क्यूं नहीं ? बड़ा सवाल है अब सरकार को हल करना ही होगा

कैसे हुई पूरी वारदात

सुकमा जिले के किस्टारम और पलोड़ी के बीच नक्सलियों ने फिर एक बड़ी घटना को अंजाम दिया है। नक्सलियों ने आईईडी ब्लास्ट कर एंटी लैंडमाइंस व्हीकल को उड़ा दिया है। इस हमले में सीआरपीएफ की 212वीं बटालियन के 9 जवान शहीद हो गए। वहीं 2 जवान घायल हैं। घायल जवानों को रायपुर भेजा जा रहा है। यह इस साल की सुकमा में सबसे बड़ी नक्सल वारदात है।

बताया जा रहा है कि सीआरपीएफ के जवान गश्त पर निकले थे, इस दौरान यह घटना हुई। कहा जा रहा है कि घटनास्थल पर बड़ी संख्या में नक्सली मौजूद थे।

चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि नक्सली भी सीआरपीएफ की वर्दी में थे, इसलिए जवानों को भ्रम हो गया। बता दें कि आईबी ने कल ही इस बारे में अलर्ट जारी किया था कि नक्सली कोई बड़ी वारदात कर सकते हैं। Pic By- INH News

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