2G स्पेक्ट्रम घोटाले मामले में कोर्ट ने राजा समेत सभी आरोपियों को किया बरी

संवाद न्यूज ब्यूरो

 

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के पहले मामले में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा और द्रमुक सांसद कनिमोड़ी समेत सभी आरोपी तीनों मामलों में बरी हो गए हैं। फैसला आते ही कोर्टरूम तालियों से गूंज उठा। बताया जा रहा है कि सबूतों के अभाव में सभी अरोपियों को बरी किया गया है। फैसला सुनाते वक्‍त जज ने कहा कि सीबीआई आरोप साबित करने में नाकाम रही है। 2जी घोटाले में फैसला आते ही लोकसभा और राज्‍यसभा में कांग्रेस ने हंगामा शुरू कर दिया। अब सवाल यह उठता है कि घोटाला हुआ, तो फिर किसने किया?

 

 

अदालत का फैसला

वकील विजय अग्रवाल ने बताया कि जज ने कहा कि सीबीआई आरोप साबित करने में नाकाम रही है, इसलिए सभी आरोपियों को बरी किया जाता है। सीबीआइ ने अभी पटियाला हाउस कोर्ट के फैसले पर कोई टिप्‍पणी नहीं की है। उन्‍होंने सिर्फ इतना कहा है कि हम फैसले की कॉपी का इंतजार कर रहे हैं। इसके बाद कोई निर्णय लिया जाएगा। इधर सूत्रों के हवाले से खबर मिल रही है कि प्रवर्तन निदेशालय ने पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष सीबीआइ अदालत के फैसले के खिलाफ हाइकोर्ट जाने का निर्णय लिया है। हालांकि ईडी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। 2जी घोटाले में बरी किए गए सभी आरोपियों से 5 लाख का बेल बॉन्ड भराया गया है, ताकि उच्च अदालत में मामला गया तो उनकी उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके। वैसे बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने आवंटन को मनमाना बताते हुए फरवरी 2012 में सभी लाइसेंस रद कर दिए थे।

 

 

क्या है 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला?

2010 में आई एक सीएजी रिपोर्ट में 2008 में बांटे गए स्पेक्ट्रम पर सवाल उठाए गए थे। इसमें बताया गया था कि स्पेक्ट्रम की नीलामी के बजाए ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर इसे बांटा गया था। इससे सरकार को एक लाख 76 हजार करोड़ रुपए का घाटा हुआ था। इसमें इस बात का जिक्र था कि नीलामी के आधार पर लाइसेंस बांटे जाते तो यह रकम सरकार के खजाने में जाती। दिसंबर 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले में विशेष अदालत बनाने पर विचार करने को कहा था। 2011 में पहली बार स्पेक्ट्रम घोटाला सामने आने के बाद अदालत ने इसमें 17 आरोपियों को शुरुआती दोषी मानकर 6 महीने की सजा सुनाई थी। इस घोटाले से जुड़े केस में एस्सार ग्रुप के प्रमोटर रविकांत रुइया, अंशुमान रुइया, लूप टेलीकॉम के प्रमोटर किरण खेतान उनके पति आई पी खेतान और एस्सार ग्रुप के निदेशक विकास सरफ भी आरोपी हैं।

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