सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ाया सराहनीय कदम, कहा- दिव्यांगों को भी उच्च शिक्षा हासिल करने का है अधिकार

संवाद न्यूज ब्यूरो:

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दिव्यांगों को भी उच्च शिक्षा हासिल करने का अधिकार है। सरकारी अनुदान पर चल रहे शिक्षण संस्थानों को दिव्यांगता एक्ट 1995 का पालन करने के लिए सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। अदालत ने साफ तौर पर कहा है कि नियमों की अनदेखी अगर की गई तो गंभीर परिणाम भुगतना होगा। एक्ट के तहत व्यवस्था बनाई गई है कि दिव्यांग छात्रों के लिए पांच फीसदी सीटें आरक्षित रखी जाएं। जस्टिस एके सीकरी व अशोक भूषण की बेंच ने दिव्यांगों के एक संगठन की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। 2006 में दायर याचिका में एक दिव्यांग युवती की स्थिति को आधार बनाकर सुप्रीम कोर्ट से अपील की गई थी कि इस दिशा में कोई फैसला हो।
याचिका में कहा गया था कि युवती नेशनल ला यूनिवर्सिटी में प्रवेश लेना चाहती थी, लेकिन उसे निजी संस्थान में दाखिल होना पड़ा। छात्रावास में उसके साथ दो अन्य सामान्य छात्राएं थीं। शौचालय में रैम्प भी नहीं था, जिससे उसे भारी परेशानी होती थी।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने विश्व विद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को एक समिति बनाने के लिए कहा है, जो इस मसले पर विचार करेगी। समिति कॉलेज स्तर पर पता लगाएगी कि दिव्यांगों को शिक्षा हासिल करने के दौरान किस तरह की परेशानी होती हैं। प्रबंधन के साथ मिलकर इन्हें दूर करने के लिए काम करना होगा। 30 जून तक यह सारा काम पूरा करना होगा। एक्शन टेकन रिपोर्ट जुलाई 2018 तक सुप्रीम कोर्ट में पेश करनी होगी।
बेंच ने यह भी कहा कि दिव्यांग छात्रों को पांच साल की छूट एक्ट के तहत मिलती है, इसकी पालना आवश्यक है। सभी राज्य दाखिलों की रिपोर्ट राज्य आयुक्त के पास भेजेंगे। बेंच ने कहा कि शिक्षण संस्थानों को सुनिश्चित करना होगा कि शिक्षा हासिल करने के बाद जब ये छात्र बाहर निकलें तो एक स्वतंत्र व आत्म निर्भर जीवन व्यतीत कर सकें।

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