आतंकी हमले पर विशेष रिपोर्ट : मोमबत्ती की लौ के आड़ में मुस्कुराते देश के सपूत !

हिमांशु राय (स्वतंत्र पत्रकार)

पुलवामा में शहीद हुए भारतीय जवानों को श्रद्धांजलि देने के लिए हमारे देश के लोग आजकल हांथों में मोमबत्तियां लेकर सड़कों पर पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाते दिखाई दे रहे हैं. ऐसा लगता है जैसे पूरी आर्मी हमारे देश में भरी है और हमारे जवान शहीद हो रहे हैं.

लेकिन क्या हांथों में कैंडल लेकर सड़कों पर चल रहे इन लोगों ने कभी ये सोचने का प्रयास किया कि ये दुखद घटना क्यों हो रही है? शायद नहीं क्योंकि हमारे देश के लोगों ने भी इन मौसमी नेताओं की तरह बस एक ही फंडा याद कर लिया है कि जब भी कोई दुखद घटना होती है बस कैंडल मार्च निकालना है.अरे अब भी जग जाओ देश के लोगों जिस कैंडल मार्च को निकालकर खुद को बहुत बड़े देशभक्त बताने की कोशिश कर रहे हो एक बात याद रखना कि ऐसे ही पूरा जीवन बीत जाएगा और हमारे देश की जनता को सुख चैन की नींद सुलाने वाले देश के वीर जवान इसी तरह शहीद होते रहेंगे. तब भी ये जनता कैंडल मार्च का ही दिखावा करती रहेगी.

दरअसल कल शाम मैं एक चाय की दुकान पर खड़ा था और कुछ ही क्षणों बाद हिंदुस्तान जिंदाबाद, पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए कुछ लोग मेरी नजरों के सामने से निकलते दिखाई दिए. जब उस दल को मैं ध्यान से देखा तो मेरा खून खौल उठा.

क्योंकि उस दल में कुछ ऐसे लोग भी दिखाई दे रहे थे जिनके चेहरों पर मुस्कुराहट दिखाई दे रही थी और तिरंगे को पकड़ना कैसे चाहिए ये भी ज्ञान नहीं था. ये नजारा देखकर मैं उस दल की तरफ बढ़ा और हंस रहे कुछ लोगों को रोक कर मैंने उनसे पूछा कि आप लोग क्या करने निकले हैं तो कुछ लोग विद्वान बनते हुए मेरी तरफ बढ़े और बोले कि दिखाई नहीं देता कि हम लोग तिरंगा यात्रा निकाल रहे हैं.

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मैंने कहा कि ये तो मुझे भी दिख रहा है कि आप लोग तिरंगा यात्रा निकाल रहे हैं लेकिन आप लोगों को देखकर ऐसा लग रहा है कि आप लोग या तो एक कोरम पूरा कर रहे हैं या तो अखबारों में काली स्याही बनकर छपने का ज्यादा शौक रखते हैं.क्योंकि आपकी इस यात्रा में मुझे उन वीर जवानों की शहादत का दर्द नहीं दिखाई देता है. आप लोग तो ऐसे हंसते हुए जा रहे हैं लग रहा है कि किसी फैशन शो या प्रतियोगिता में भाग लेने जा रहे हैं. मेरी बातों में क्रोध था और आंखों में बिजली कौंध रही थी. तभी एक महाशय ने मेरी तरफ बढ़कर मुझे समझाने की कोशिश की.

उन्होंने मुझसे कहा कि हम क्या कर सकते हैं. कुछ सिस्टम बनाए गए हैं जिसका निर्वहन सरकार और कानून करता है. हम तो बस अपना विरोध दर्शा सकते हैं.बाकी हमारे हांथों में क्या रखा है.फिलहाल मैं उस यात्रा को आगे बढ़ने दिया. लेकिन वो हंसी मेरे दिमाग में एक बुलेट की तरह लग गई और मैं अपने क्रोध पर काबू नहीं पा सका. शायद इसीलिए मेरी कलम भी स मुद्द् पर लिखने पर मजबूर हो गई.

आज के वक्त में यदि हम वक्त की नजाकत को समझें तो ये साफ दिखाई दे रहा है कि हमारे देश को कमजोर बनाने वाला, हमारे देश के अंदर हो रहे अपराधों को बढ़ावा देने वाला, माताओं और बहनों के साथ हो रही दरिंदगी का जिम्मेदार कोई और नहीं बल्कि हमारे देश की यही हंसने वाली जनता है. जिसे कैंडल मार्च निकालकर सुर्खीयों में छपने का शौक है. तो ऐसे लोगों के लिए मैं यही कहना चाहूंगा कि-

जिन्हें बहुत शौक रहा सुर्खीयों में छपने का
वो भी एक दिन रद्दी के भाव बिक गए

शर्म नहीं आती है लोगों को सिर्फ यही कहते फिरते हैं कि पीएम नरेंद्र मोदी ने कुछ नहीं किया, फलाना ने कुछ नहीं किया अरे मैं कहता हूं कि अगर इतना ही तीर मारते फिरते हो तो जरा ये बताओ जनाब कि तुमने अपने वतन के लिए क्या किया.

 

हमारे देश का ये रीति रिवाज बन गया है कि जब भी कोई दुखद घटना घटती है तो जनता कैंडल मार्च निकालेगी और ये मौसमी नेता उन वीर जवानों की शहादत पर उनके परिवार को चंद कागज की धनराशि देने के लिए धोती का फेटा मार लेते हैं.जो वीर जवान हमेशा मौत के साए में अपना जीवन व्यतीत करते हैं शायद उनको भी पीएम के आदेश की जरूरत पड़ती है अपनी जान बचाने के लिए. हमारे देश का रक्षा मंत्रालय और देश का पीएम मिलकर आपस में बात करेंगे और तब तक न जाने कितने जवान मातृभूमि पर गिरकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर चुके होते हैं.

 

फिर अचानक आदेश मिलता है बड़े दरबार से कि सेना को खुली छूट दी जाती है कि दुश्मन बचने न पाए. आज जो लोग सड़कों पर कैंडल लिए दिखाई दे रहे हैं इन्हीं लोगों में वो शख्स भी छुप कर नारे लगा रहा है जो किसी भी वक्त एक नई घटना को अंजाम देता है. ये कोई और नहीं बल्कि वहीं लोग हैं जिन्हें मैंने उस वक्त हंसते देखा जब पूरा देश जवानों की शरहादत से शोकाकुल है.

ऐसे लोगों को देखकर बस यही बात मेरे मन में उठ गई कि उम्र सारी गुनाहों में गुजरी, अब ऐसे शरीफ बन रहे हैं जैसे गंगा नहाए हुए है. हमारे जवान सीमा पर आए दिन शहीद होते हैं और देश के अंदर छुपे जहरीले बिच्छू आए दिन आम जनता को डंक मारते फिरते हैं. शर्म नहीं आती ऐसे लोगों को जो वीरों की शहादत में भी हंस रहे हैं. अरे जाकर पूछिए उस परिवार से जिन्होंने अपना बेटा, अपना पति और अपना भाई खो दिया.

शायद जब उनके शहादत की बात परिवार को पता चली होगी तो उन माताओं के भी लब खामोश पड़ गए होंगे जिन्होंने बड़े दुलार से अपने जिगर के टुकड़े को बड़ा किया था और भारत माता के आंचल में हमेशा के लिए सौंप दिया. मैं यही सोचकर शांत पड़ गया कि ये हंसी इन लोगों कि गलती नहीं है.

ये लोग भी उन मौसमी नेताओं की तरह ही हैं जो सिर्फ और सिर्फ नारेबाजी करने और कैंडल मार्च निकालने के लिए ही बने हैं. अब भी अपनी आंखें खोल लीजिए. यदि हम अपने देश के अंदर खुद सुरक्षा के लिए तत्पर नहीं होंगे तो हमारे जवान दुश्मन के मुंह पर खड़े होकर कितना संघर्ष करेंगे.


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