सरकार को शहीदों की फ़िक्र बस चंद दिनों तक !

विकाश शुक्ला की स्पेशल रिपोर्ट

हमारे जवान शहीद होते है, सरकार और जनता उनकी बहादुरी को सलाम करती है, यहाँ तक उस शहीद का नाम कई चुनावी रैली में लिया जाता है और उसकी शहादत पर गर्व किया जाता हैं. अभी पुलवामा हमला हुआ हमारे कई वीर जवान देश के लिए शहीद हो गए है सिर्फ जनता की नजर में ना की सरकारी फाइलों में, फिलहाल सरकार ने इस शहीद परिवार की जिम्मेदारी ली और कहा कि हर शहीद के परिवार में किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी और तमाम सरकारी सुविधा दी जायेगी, शहीद की अंतिम विदाई में कई बड़े नेता और मंत्री पहुंचे शहादत को सलाम किया, और बहुत कुछ वादे करके वापिस आ गए

चुनाव नजदीक है, हर रैली में पुलवामा और एयरस्ट्राइक का नाम लेकर वोट बैंक की राजनीति जारी है, ठीक है राजनीति करो वो भी जरुरी है लेकिन शहीदों के नाम पर नहीं, अपने काम के बल पर राजनीति करो, राजनेताओं ने नया जुलुस निकाला है कोई सड़क पर अपनी जुबान से पाकिस्तान के टुकड़े कर रहा है तो कोई सेना की वर्दी पहनकर राजनीति करने मैदान पर उतर पड़ा है. अरे शर्म करो अगर सेना की वर्दी पहनने का इतना शौक है तो सेना का एंट्रेंस एग्जाम देकर परीक्षा पास करो और देश के लिए बॉर्डर पर पहुंच जाओ, फिर ये वर्दी आपके ऊपर बहुत अच्छी लगेगी और देश गर्व भी करेगा !

दरअसल हम बात करेंगे शहीद परिवार के लिए किये हुए सरकार के वादे की, जो बोल तो दिए जाते है लेकिन मिलता कितना है. इसकी एक कहानी सामने है दरअसल तक़रीबन तीन बरस पहले जम्मू कश्मीर के सियाचिन में शहीद होने वाले लांसनायक हनुमंथप्पा की बहादुरी को पुरे देश ने सलाम किया था.आपको बता दे कि लांसनायक हनुमंथप्‍पा सियाचिन में 6 दिनों तक बर्फ के नीचे दबे रहे, फिर सेना ने पड़ताल कर उनको ज़िंदा बाहर निकाला, लेकिन उनकी तबियत बहुत ज्यादा असहज हो चुकी थी.इसलिए उनको बचाया नहीं जा सका और लांसनायक हनुमंथप्‍पा देश के लिए शहीद हो गए.

Photo Source- Social Media

इस वीर जाबाज़ शहीद की मौत के बाद कर्नाटक के धारवाड़ जिले में स्थित इनके गांव बेटादुर में कई दिग्गज मंत्रियों और अधिकारीयों का काफिला आया और शहीद परिवार से बहुत सारे वादे किये और फिर चले गए,

केंद्र और राज्य सरकार ने सरकारी नौकरी देने का वादा किया था. साथ साथ उनकी 5 साल की बेटी का जीवन सवारने और सुरक्षित रखने का वादा किया था. लेकिन ये सिर्फ वादा ही रह गया. शहीद लांसनायक हनुमंथप्‍पा की पत्नी पत्‍नी महादेवी को अब तक कोई नौकरी नहीं मिल सकी है। उनके घर की स्थिति बहुत दयनीय है, बेटी को अच्छे स्कूल में पढ़ाने के लिए पैसे नहीं है जिससे की वो अपनी बेटी को बेहतर शिक्षा दिला सके

महादेवी ये भी बताती है कि केंद्रीय मंत्री स्‍मृति ईरानी ने मुझे सरकारी नौकरी दिलाने को लेकर ट्वीट किया था लेकिन जब हुबली आने पर मैंने उनसे मुलाकात की तो उन्होंने ऐसा कोई भी ट्वीट किये जाने से इंकार कर दिया। यहाँ तक कि कर्नाटक सरकार ने महादेवी को कृषि भूमि के नाम पर ऐसी बंजर जमीन दी जहा कुछ उगाया नहीं जा सकता।

 

शहीद जवान की पत्‍नी के मुताबिक, उन्‍होंने नौकरी पाने के लिए काफी मशक्‍कत की लेकिन शायद अब मुख्यमंत्री और मंत्री लोग शहीद लांसनायक हनुमंथप्पा को भूल गए, शहीद की पत्नी महादेवी कहती है कि सरकारों की असंवेदनशीलता को देखते हुए अब मैंने नौकरी के लिए कहना छोड़ दिया है बस बेटी के भविष्‍य की चिंता खाए जा रही है।

ऐसे करती है हमारे जवानों की सेवा हमारी सरकार, जवान शहीद हो जाता है चार दिन तक घर पर कई दिग्गज हस्तियों का जमावड़ा लगा होता है उसके बाद जब कभी चुनाव आता है तो फिर मुँह उठाकर रैली में उन्ही शहीदों का नाम लेकर नेता जी रैली और वोट बैंक की राजनीति करना शुरू कर देते हैं.


डिस्क्लेमर : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति संवाद न्यूज़ उत्तरदायी नहीं है.

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