केजरीवाल के घर पहुचे बीजेपी सांसद मनोज तिवारी, बैठक में हुआ हंगामा,

संवाद न्यूज़ ब्यूरो

नई दिल्ली: दिल्ली में सीलिंग के मुद्दे पर दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी सहित बीजेपी के कई बड़े नेता आज मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मुलाकात करने उनके घर पहुंचे. केजरीवाल ने बीजेपी नेताओं को आदर से बिठाया. बातचीत भी शुरू हुई, लेकिन बैठक में बहस और हंगामा हो गया. इस मामले पर केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा है कि वह सीलिंग रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएंगे.

सीलिंग की वजह से लोगों की रोजी रोटी छिनी- केजरीवाल

सीएम केजरीवाल ने कहा, ‘’MCD की सीलिंग की वजह से इतने सारे लोगों की रोजी रोटी चली गयी, काम बंद हो गए ये दुःख की बात है.” उन्होंने कहा, ‘’कल जब बीजेपी की चिट्ठी आयी की वे मुझसे सीलिंग के मुद्दे पर मिलना चाहते हैं तो मुझे ख़ुशी हुई की हम सब सामने मिल बैठ कर समाधान निकाल लेंगे, लेकिन वो बंद कमरे में बैठ कर बात करना चाहते थे.’’

केजरीवाल ने आगे कहा, ‘’दिल्ली की 351 सड़कों का मुद्दा, सीलिंग का मुद्दा बिलकुल भी नहीं है. हम विधि विशेषज्ञों के संपर्क में हैं और सीलिंग रुकवाने के लिए दिल्ली सरकार सुप्रीम कोर्ट जायेगी.” उन्होंने कहा कि उपराज्यपाल और केंद्र सरकार चाहें तो ये विवाद सुलझ सकता है. केंद्र सरकार को इसपर अध्यादेश लाना चाहिए. वहीं आज इस मामले पर आम आदमी पार्टी ने बीजेपी की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए.

राजनीति कर रहे हैं केजरीवाल- तिवारी

वहीं, इस मामले पर मनोज तिवारी ने कहा, ‘’हमने केजरीवाल से मिलने का समय मांगा था. पत्र भी लिखा. पूरी दिल्ली सीलिंग से परेशान है. लेकिन आज जब समय मांगा तो उन्होंने मीडिया को बुला लिया. वह इस मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं. हम एलजी से भी मिलेंगे. एक सेशन इसका भी बुलाइए.’’

कल केजरीवाल ने उपराज्यपाल को लिखा था पत्र

दरअसल बीजेपी का प्रतिनिधिमंडल सीलिंग के मुद्दे पर अरविंद केजरीवाल से बात करने पहुंचा था. इससे पहले सोमवार शाम को अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के उपराज्यपाल को ख़त लिखकर कहा कि सीलिंग के मुद्दे पर बीजेपी के विधायक, पार्षद मुझसे मिलने कल सुबह 9 बजे मेरे घर आ रहे हैं लेकिन चूंकि यह आपका अधिकार क्षेत्र है तो इन सबको लेकर सुबह 9.30 बजे मैं आपके पास आऊंगा.

क्या है दिल्ली में सीलिंग का विवाद?

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने साल 2006 में अवैध निर्माण की सीलिंग करने के आदेश जारी किए थे. इस आदेश पर बवाल बढ़ता देख केंद्र सरकार साल 2006 में ही दिल्ली स्पेशल प्रोविजन बिल लाई. इस बिल के तहत तब तक बन चुकी अवैध इमारतों को सीलिंग के दायरे से बाहर कर दिया गया. अब जुलाई 2014 के बाद हुए अवैध निर्माण पर सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है.

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