अंतरराष्ट्रीय नारी दिवस पर ख़ास पेशकश : एक बेटी की आवाज !

 (दीक्षा राय) 
मेरे लिए दुनिया के हर रिश्ते बाद में हैं | सबसे पहले मैं एक बेटी हूँ, और अपनी आवाज भारत कि हर बेटी तक पहुँचाना चाहती हूँ | इस उम्मीद से, कि आप मेरी आवाज को नजरअंदाज नहीं करेंगे |हमारा देश आज इस स्थिति में पहुँच चुका है, जहाँ एक तरफहम नारी के सम्मान का नारा लगाते हैं, तो दसरी तरफ भ्रूण हत्याजैसा घिनौना अपराध करते हैं | ये हमारे लिए इतना शर्मनाक है,जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते |

द्वापर युग में कंस ने माता देवकी की सारी संतानों को मार डाला | अंत में श्री कृष्ण ने जन्म लिया, जिसकी रक्षा योगमाया ने की | सब जानते हैं, कंस बहुत ही बुरा था, जिसने ऐसा अक्षम्यअपराध किया | मगर आज के युग में, कंस बन पाना भी सहज नहीं है | क्योंकी उसके मन में अपनी मौत का भय था, जिसने उसे ऐसा करने पर मजबूर किया | लेकिन उसने भी, उन संतानों के जन्म लेने तक इंतजार किया | उनकी हत्या करते वक्त, उसने बेटा या बेटी का भेद नहीं किया | अब ये कहना भी उचित नहीं है की, उस वक्त विज्ञान इतना आगे नहीं था, जो गर्भ में पल रहे शिशु का लिंग परिक्षण किया जा सके.

 

आज लोग निरपराध शिशु को गर्भ में ही मार देते हैं | उन्हेंबेटी का चेहरा देखना तक गवारा नहीं, हम खुद सोच सकते हैं की, असली कंस कौन है ? वो, जिसकी हत्या कृष्ण ने की ? या वो, जो खुद बेझिझक अपनी संतानों की हत्या कर रहें हैं |जिस बेटी ने योगमाया बनकर कंस को सबक दिया, आज वो माँ के गर्भ में नौ माह भी सुरक्षित नहीं |

 

जिस लक्ष्मी बाई ने नारी शक्ति का प्रदर्शन किया, अपने दम पर अंग्रेजों से लोहा लिया, आज वो किससे हार गई ? आखिर ऐसा क्यों है ? क्या आज की नारी इतनी कमजोर है ? नहीं, वो कमजोर नहीं, बल्कि मजबूर है, उसके अपनों से | उनसे, जिन्हें सिर्फ बेटे कि चाहत है, बेटी कि नहीं | हम जिस समाज में नारी शक्ति या उसके सम्मान की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, उसी समाज में रहकर, बेटे और बेटी मेंभेदभाव करते हैं | हम बेटी को अच्छी शिक्षा तथा बेटे की बराबरी दिलाने का दावा भी करते हैं और उसे बेटी कहकर उसके सपनों का पल-पल गला भी घोंटते हैं |

मेरे जेहन में एक सवाल हमेशा आता है | बेटे और बेटी की बराबरी कैसी ? बेटियाँ बेटों से किस मायने में कम हैं, जो उनके बराबर हक पाने के लिए उन्हें दुनिया से लड़ना है ? बेटियाँ तो सदा से ही सर्वोपरी हैं | उन्हें किसी से बराबरी करने की कोई आवश्यकता नहीं | क्योंकी उनकी बराबरी खुद ये दुनिया नहीं कर सकती |अगर ऐसा होता तो, हमारे देश में कभी नारी को देवी का दर्जा नहीं दिया जाता | वो तो प्रेम, त्याग, और समर्पण की मूरत हैं |आजादी का सफर तय किए वर्षों बीत गये | पर अब भी लगता है जैसे, कहीं रास्ते में ही हैं |

 

धीरे – धीरे बेटियों को कुछ स्वंतत्रता तो मिल रही है | फिर भी ऐसा क्यों है, कि शिखर तक पहुँचने वाली नारियों की संख्या मुट्ठी भर ही है ? देश के हर क्षेत्र में आज भी अधूरी दिखती है औरत की कहानी |मैं अपने पाठकों से एक सवाल करना चाहती हूँ | क्या आपने कभी किसी भ्रूणहत्या में किसी का साथ दिया है ? यदि नहीं, तो आप मेरी आवाज देश के हर घर तक पहुँचाने में मेरा साथ दें, ये मेरी आपसे विनती है | और यदि हाँ, तो सिर्फ इतनी ही विनतीहै, कि आज और अभी से अपनी इस सोच को बदल दें | क्योंकि, ऐसा करके , आप किसी मासूम बेटी और मजबूर माँ को जीवन का सबसे बड़ा और प्यारा तोहफा देंगे |

अपनी सारी नारी पठिकाओं से मैं ये आग्रह करना चाहती हूँ,कि यूं हाथों पर हाथ रखकर तमासा देखने से कुछ नहीं बदलने वाला | बदलाव का सपना देखने वालों को, आँखे खोलकर उसे पूरा भी करना चाहिये | इसके लिए पहला कदम नारी को ही उठाना होगा | ये दुनिया बहरी है | इस तक अपनी आवाज पहुँचाना है, तो चौगुनी आवाज में चिल्लाना होगा | वरना सिर्फ यही कहते रह जाएंगे कि पुरुषों को सुधारो, पुरूषों से शुरुआत करो, मगर सब वैसा का वैसा रहेगा |

 

यदि बुराई को मिटाना है, तो पहले अपने अंदर से मिटाना होगा | तभी हम आगे बढ़ सकते हैं | बेटियाँ अब सड़को पर ही नहीं, बल्कि कहीं भी महफूज नहीं हैं | फिर कहाँ तक भाग सकती हैं और कितना छुप सकती हैं ? कभी तो इसका विरोध करना ही होगा, वरना इस धरती की काया ही पलट जायेगी | मैं उन महिलाओं से निवेदन करना चाहती हूँ, जो भ्रूणहत्यामें पुरुषों का साथ देती हैं | आप ये क्यों भूल गयीं, कि आप भीएक बेटी हैं ? आपको भी किसी ने जन्म दिया है, तभी आज आपऔरत कहलाईं, और वो भी एक माँ थी, जिसने आपको ये दुनियादेखने का अधिकार दिया | माँ होने का ऐसा परिचय मत दीजिए |

 

इस धरती पर एक माँ ही है, जो बेटी कि सबसे अच्छी दोस्त होतीहै | जिसपर वो रब से ज्यादा भरोसा करती है | उस बेगुनाह को दुनिया में आने से मत रोकिये | उसे भी ये खूबसूरत, रंग बिरंगीदुनिया देखने का इंतजार है | जो बेटा नहीं कर सकता वो बेटी कर सकती है | बस थोड़ा सा प्यार ही तो चाहिए उसे | क्या आप इस काबिल भी नहीं ? देश की जनसंख्या कम करने के बहाने, हत्या जैसा घोर पापमत कीजिये | अगर दो संताने बेटियाँ हैं, तो आपको बेटे का इंतजार करने की कोई आवश्यकता नहीं | आपके पास तो वो हीरा है जिसे आप किसी भी जेवर का रूप दें, वो सदा अपनी चमक से आपकी शोभा बढ़ाएगी | सोच बदलिए, देश खुद बदल जायेगा |

 

हर बेटी को मेरी आवाज में ये संदेश है, कि “उठो, और आगे बढ़ो, सबको ये एहसास दिलाओ, की तुम बेटी हो इसमें तुम्हारा दुर्भाग्य नहीं, बल्कि बेटे की चाहत रखने वालों का सौभाग्य है |” पर्दों के पीछे रहकर, बहुत दबा चुके अपनी आवाज को | लोगों को बेटी का मोल समझाना अब इतना भी सहज नहीं रहा |

इसके लिए हमें कदम बढ़ाना ही होगा | मगर पहली शुरुआत अपनों से करनीहै | क्योंकि, यदि हमने एक जीवन बचा लिया, एक परिवार मेंअपना हक़ पा लिया, अपने माँ बाप को, अपने सपने और जज्बातों का महत्व समझा लिया, तो मुमकिन है, कि देश की हर बेटी को उसका हक़ मिल जाये | आज के युग में कृष्ण नहीं आएंगे, दुनियाको कंस से छुटकारा दिलाने | इसलिए जरूरी है, कि हम लोगों के दिलों में बसे कंस का संहार, खुद करने की शपथ लें |

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